Poem

सिंगल बुक…

सिंगल सिंगल रात कटी क्यों? पता चला है.
तुरु तुरु
सिंगल सिंगल रात कटी क्यों? पता चला है.
अरे हड्डी मरोड के दिल तौडा है दिल तौडा है.
सिंगल सिंगल पता चला है. हड्डी मरोड के दिल तौडा है.
सिंगल सिंगल पता चला है. हड्डी मरोड के दिल तौडा है.

एक परिन्दा है शर्मिंदा, था वो चंगा.
भाई अब तो डंडे पडकर हो गया नंगा.
सोच रहा है आखिर प्रपोज क्यों किया है.
तुरु तुरु
अरे हड्डी मरोड के दिल तौडा है दिल तौडा है.
सिंगल सिंगल पता चला है. हड्डी मरोड के दिल तौडा है.
सिंगल सिंगल पता चला है. हड्डी मरोड के दिल तौडा है.

विडंबन: जयेश शत्रुघ्न मेस्त्री


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