Poem

बातो बातो में

युं दिल मिल गये, बातो बातो में।
युं गुल खिल गये, बातो बातो में।

इस पल में मैं सोचकर हैरान हूं।
वो पल बित गये, बातो बातो में।

तुम्हे याद हैं सर्दी की वो गर्म राते?
एक जिस्म हो गये, बातो बातो में।

सुंदर दिन थे, तुम-हम मिलते थे।
वे कारवां हो गये, बातो बातो में।

वो चुंबन, वो आलिंगन, वो प्रणय।
बस फसाने रह गये, बातो बातो में।

कविता: जयेश शत्रुघ्न मेस्त्री


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